This is my first poem on bravery which i have written for one of my colleague preparing for CFA:
इरादे तो तुम करते हो बड़े बड़े,
देखना है तूफान में कितने पेड़ रहते है खड़े
दुआ है टकरा जा सारी बाधाओं से तू,
तोड़ सारे पत्थर बन नदी आगे बढे
अगर हो दम किसी में तो,
तान के सीना हम से भिडे
मिला देंगे मिटटी में उसे,
जो सामने आने की गलती करे ||
I have also written a small sher:
वोह आंधी की तरह आये और तूफ़ान की तरह चले गए
हमारे चैनो-आरम को निश्तो-नाबूद कर गए
हम इतने नासमझ ठहरे और भुला दिया
कि हवा को कौन पकड़ पाया है भला |
--- लम्हा (Lamha)
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Wednesday, November 11, 2009
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