These are a few which i wrote because of people's initial commnets/feedback:
शायर तो हम हमेशा से थे,
पर इस दुनियादारी की भाग-दौड़ में हम खुद को ही भुला बैठे |
हमें न निकालो उनके ख्यालों से बाहर,
कुछ तो रहने दो जीने के लिए, हमारी सांस तो कब की बंद है |
this one is dedicated to my batch-mates cum colleagues, my good friends:
तुम्हारा साथ था तो हस्ते हुए ऊंचाईयां छूते चले गए,
जब से तुम गए तब से ये रस्ते भी बेगाने लगते है |
--- लम्हा (Lamha)
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